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आयुर्वेद, संस्कृत एवं गोसेवा का एक सशक्त और पावन हस्ताक्षर
चित्रकूट की पावन तपोभूमि में भारतीय ज्ञान-परंपरा, आयुर्वेद चिकित्सा, संस्कृत शिक्षा, संस्कार, गौसेवा एवं समाजसेवा के समन्वित उद्देश्य से विकसित आयुष ग्राम (न्यास) आज लगभग 29 एकड़ के विस्तृत परिसर में विभिन्न सेवा-प्रकल्पों का संचालन कर रहा है। आयुष ग्राम की स्थापना के पीछे मूल भावना ऐसी जीवन-पद्धति और सेवा-व्यवस्था विकसित करने की रही है, जिसमें शास्त्रोक्त आयुर्वेद, भारतीय संस्कृति, आधुनिक शिक्षा, प्राकृतिक जीवन, गौसेवा और राष्ट्रसेवा एक-दूसरे के पूरक बनें।
ऐतिहासिक शिलान्यास: 23 नवम्बर 2012, शुक्रवार (कार्तिक शुक्ल दशमी, संवत् 2069) को सूरजकुण्ड रोड, पुरवा तरौहा मार्ग, झपोला पहाड़ियों के बीच चित्रकूटधाम (उत्तर प्रदेश) में आयुष ग्राम (न्यास) का शिलान्यास एवं भूमिपूजन सम्पन्न हुआ। यह शिलान्यास श्री कामता प्रसाद वाजपेयी के कर-कमलों द्वारा किया गया था।
संस्थान के संस्थापक एवं संस्थाध्यक्ष आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी के मार्गदर्शन में वर्तमान में मुख्य रूप से आयुष ग्राम चिकित्सालय, आयुष ग्राम संस्कृत विज्ञान उच्चतर माध्यमिक गुरुकुलम् एवं धनवंतरी गो सेवालय सहित विभिन्न सेवा-प्रकल्प संचालित हैं।
इससे पूर्व सन् 1989 से उत्तर प्रदेश के बांदा जिलान्तर्गत पनगरा ग्राम में 'दिव्य चिकित्सा भवन' के माध्यम से आयुर्वेद एवं गोसेवा की जा रही थी। बाद में धीरे-धीरे सभी प्रकल्पों को आयुष ग्राम (न्यास) में ही पूर्णतः विलय (Merge) कर दिया गया, जिससे सभी प्रकल्पों को एक विशाल और एकीकृत रूप मिला।
न्यास का प्रमुख प्रकल्प आयुष ग्राम चिकित्सालय है, जहाँ आयुर्वेद की विशुद्ध एवं शास्त्रोक्त चिकित्सा पद्धति के माध्यम से रोगियों का उपचार किया जाता है। चिकित्सालय में ओपीडी (OPD), आईपीडी (IPD), और पंचकर्म आदि विभिन्न आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवाओं के माध्यम से भारतवर्ष के विभिन्न प्रांतों से आने वाले जटिल एवं असाध्य रोगों जैसे—किडनी, लिवर, जलोदर, लिवर सिरोसिस,蓄 हार्ट, वातजव्याधि आदि से पीड़ित रोगियों की सफल चिकित्सा की जाती है।
यहाँ किडनी रोगियों की डायलिसिस व बढ़े क्रिटनीन में आराम मिलता है, वहीं जलोदर व लिवर सिरोसिस से ग्रस्त रोगियों में भी आयुर्वेद का अविश्वसनीय व सकारात्मक परिणाम मिलता है। चिकित्सालय की ओपीडी सोमवार को छोड़कर सप्ताह के प्रत्येक दिन संचालित होती है। आवश्यक औषधियों का निर्माण स्वयं की फार्मेसी में किया जाता है। वर्तमान में यहाँ लगभग 100 से 150 सहयोगियों का स्टाफ (डॉक्टर्स, फार्मासिस्ट, प्रशासनिक अधिकारी) अपनी सेवाएँ दे रहा है।
गुरुकुल शिक्षा: इसके अंतर्गत संचालित आयुष ग्राम संस्कृत विज्ञान उच्चतर माध्यमिक गुरुकुल भारतीय गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा (NCERT एवं आधुनिक पाठ्यक्रम) के समन्वय का प्रयास है। यहाँ उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, नई दिल्ली, लखनऊ सहित विभिन्न राज्यों से विद्यार्थी आते हैं। विद्यार्थियों को शिक्षा एवं आवास निःशुल्क उपलब्ध कराया जाता है तथा भोजन की न्यूनतम व्यवस्था शुल्क ली जाती है।
सात्विक आहार-विहार: परिसर में राजसी एवं भोगप्रधान प्रवृत्तियों से मुक्त रखने का प्रयास किया जाता है। यहाँ भोजन व्यवस्था में लहसुन एवं प्याज व किसी भी प्रकार के नशीले पदार्थों का प्रयोग वर्जित है, तथा विशुद्ध सात्विक एवं प्राकृतिक जीवनशैली का पालन किया जाता है।
प्राकृतिक एवं गो-आधारित कृषि: परिसर की भूमि पर रासायनिक खाद एवं पेस्टीसाइड से मुक्त पूर्णतः प्राकृतिक कृषि पद्धति के माध्यम से अन्न, हरी सब्जियाँ और अन्य कृषि उपज का उत्पादन किया जाता है।
गोसेवा की परंपरा: परिसर में स्थापित धनवंतरी गो सेवालय में 250 से अधिक गिर, देशी एवं साहिवाल गोवंश की सेवा एवं संरक्षण किया जाता है। इसका मूल उद्देश्य व्यावसायिक न होकर गोवंश का संरक्षण, संवर्धन एवं भारतीय धरोहर के रूप में संजोकर रखना है।
आध्यात्मिक वातावरण: परिसर में पूर्व में आयुष ग्रामेश्वर महादेव एवं भगवान धनवंतरी की प्रतिष्ठा सम्पन्न हो चुकी थी। इसके पश्चात 22 जनवरी 2024 को अयोध्या में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के पावन अवसर पर आयुष ग्राम परिसर में स्थित आयुष बिहारी श्रीराम मंदिर में श्रीराम दरबार, मां दुर्गा एवं आयुष बिहारी राधा-कृष्ण जी की प्रतिष्ठा सम्पन्न की गई।
स्वावलम्बी व्यवस्था एवं गौरव: यह न्यास किसी भी सरकारी/गैर-सरकारी अनुदान या चंदे पर निर्भर नहीं है, बल्कि इसका व्यय संस्थापक आचार्य डॉ. मदन गोपाल वाजपेयी जी के परिश्रम और अनवरत प्रयासों से वहन होता है। आयुर्वेद क्षेत्र में उनके 30 वर्षों के गहन अनुभव एवं योगदान को देखते हुए, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ (RAV) द्वारा उन्हें वर्ष 2025 से 'गुरु' के प्रतिष्ठित पद पर नियुक्त किया गया है।